शनिवार, 23 नवंबर 2013

" सइयां और भइया...!!! "

न मजाक 
न नसीहत 
है हकीकत 
ज़ुबां खोली, 
न नियम
बताया 
नजरें मिलाई,
न आँखें
दिखाई,
सिर्फ हिला-हिला
कर दुम....,
पा ली मलाईदार 
पोस्टिंग 
अब कैसा डर,
कोतवाल 
बने हैं सइयां
जिसने
पितातुल्य 
बताकर
"माँ" तक 
बनाई 
अपनी पहुँच, 
वो ही 
अब कहने 
लगा है भइया...!!! "

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

आखिर कैसे...?

 अब कैसी
होगी पहरेदारी,
कैसी होगी 
जान-माल 
की सुरक्षा, 
मुफ्त मिलने 
लगी लोकप्रियता, 
एक-दूसरे 
को देख 
जो गुर्राते रहे, 
अब साथ-साथ 
करने लगे मस्ती, 
"कुत्ते" और "चिहाट" 
में हो गई दोस्ती...!!! 

बुधवार, 6 नवंबर 2013

"बोलने की सजा..!!!"

" जो चुप थे,
वो अब भी
जिन्दा हैं ,
"हमने" तो
बोलकर
अपनी "सजा" 
मुकर्रर
कर ली,
चलो अच्छा
ही हुआ
"मरा -मरा"
सा " जिन्दा "
रहना भी तो
गवारा नहीं था। "

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

चुनावी बयार..!

बह रही
चुनावी बयार
उठने लगा
भावनाओं
का ज्वार
किसी को चढ़नें
लगा बुखार
तो किसी की
"माई" बीमार
किसी का हो गया
घर निकाला
कोई कर रहा टिकट
के लिए मनुहार
मतदाता सिर्फ
इसी में मस्त
मिला जो अस्वीकार
का अधिकार
राजनीति का
चेहरा सख्त
भरे है एक से
 एक "कम्बख्त"
अब तो मौतों
पर भी होने
लगी सियासत
..!  

रविवार, 13 अक्टूबर 2013

" हो रहा निर्माण "

गिर गया पुल
बह गया रपटा
सड़क में गड्ढे
गड्ढों में सड़क
ईमानदारी
 से करना
चाहा काम
हो गया
जीना हराम
मज़बूरी ने
 पहुंचा दिया
कमीशनखोरों
 के मकान
इसीलिए तो
एक ही
सड़क का
बार-बार
 किया निर्माण...!!!

शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

किसिम-किसिम के रावण..!

कौन राम 
 कौन रावण 
मुश्किल
पहचान है 
जिसे समझो
" राम " वो ही
 निकलता 
" रावण "  है 
असली रावण 
 था अलोकतांत्रिक
लोकतंत्र में
 किसिम-किसिम
 के रावण  हैं  
असत्यवादी 
अहंकारी 
अशिक्षित 
चरित्रहीन 
सांप्रदायिक 
वंशवादी 
जातिवादी 
भ्रष्ट-स्वार्थी 
अपराधी 
ना जानें और
 कितने रूप हैं
" दाह " उपजाने 
वाले इन रावणों 
को मारो  मत 
हरा डालो 
मौका-ए-चुनाव है. 

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

" बेटिकट "

सुनते थे
दिल्ली
" दिल "
 वालों
की है,
गए
तो पता
चला-
दिल्ली तो
सिर्फ
" पैसे "
वालों की है.
गए तो
" टिकट " के
लिए थे,
" बे-टिकट "
लौटे
बद - किस्मती
देखिये-
धरे भी
गए तो
  " बेटिकट ! "