न मजाक
न नसीहत
है हकीकत
ज़ुबां खोली,
न नियम
बताया
नजरें मिलाई,
न आँखें
दिखाई,
सिर्फ हिला-हिला
कर दुम....,
पा ली मलाईदार
पोस्टिंग
अब कैसा डर,
कोतवाल
बने हैं सइयां
जिसने
पितातुल्य
बताकर
"माँ" तक
बनाई
अपनी पहुँच,
वो ही
अब कहने
लगा है भइया...!!! "
अब कैसी
होगी पहरेदारी,
कैसी होगी
जान-माल
की सुरक्षा,
मुफ्त मिलने
लगी लोकप्रियता,
एक-दूसरे
को देख
जो गुर्राते रहे,
अब साथ-साथ
करने लगे मस्ती,
"कुत्ते" और "चिहाट"
में हो गई दोस्ती...!!!
" जो चुप थे,
वो अब भी
जिन्दा हैं ,
"हमने" तो
बोलकर
अपनी "सजा"
मुकर्रर
कर ली,
चलो अच्छा
ही हुआ
"मरा -मरा"
सा " जिन्दा "
रहना भी तो
गवारा नहीं था। "