शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

चुनावी बयार..!

बह रही
चुनावी बयार
उठने लगा
भावनाओं
का ज्वार
किसी को चढ़नें
लगा बुखार
तो किसी की
"माई" बीमार
किसी का हो गया
घर निकाला
कोई कर रहा टिकट
के लिए मनुहार
मतदाता सिर्फ
इसी में मस्त
मिला जो अस्वीकार
का अधिकार
राजनीति का
चेहरा सख्त
भरे है एक से
 एक "कम्बख्त"
अब तो मौतों
पर भी होने
लगी सियासत
..!  

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