सरताज
बुधवार, 6 नवंबर 2013
"बोलने की सजा..!!!"
" जो चुप थे,
वो अब भी
जिन्दा हैं ,
"हमने" तो
बोलकर
अपनी "सजा"
मुकर्रर
कर ली,
चलो अच्छा
ही हुआ
"मरा -मरा"
सा " जिन्दा "
रहना भी तो
गवारा नहीं था। "
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