" सइयां और भइया...!!! "
न मजाक
न नसीहत
है हकीकत
ज़ुबां खोली,
न नियम
बताया
नजरें मिलाई,
न आँखें
दिखाई,
सिर्फ हिला-हिला
कर दुम....,
पा ली मलाईदार
पोस्टिंग
अब कैसा डर,
कोतवाल
बने हैं सइयां
जिसने
पितातुल्य
बताकर
"माँ" तक
बनाई
अपनी पहुँच,
वो ही
अब कहने
लगा है भइया...!!! "
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