" ऐ री बकरी
अब तक तो
ऐसा कभी
नहीं सनकी,
तू तो शबरी थी
क्यूं हो गई
कबरी है,
गुस्से का ऐ
क्या तरीका है,
बिना चारा-पानी
के इस गोरी ने
दूध दुहने की
गुस्ताखी की
या फिर
खुले में शौच
का नतीजा है..??? "
" जलप्लावित है
हजारों गांव,
चल रही राहत
चल रहा बचाव,
उफन रही झेलम
तो सडकों में बहने
लगा डल का जल,
श्रीनगर का ये क्या
हाल हो गया …?
कश्मीर क्यूं इतना
बदहाल हो गया....?
मांगनी पड़ रही है
जान की मन्नत,
क्यों जहन्नुम बन
गई जमीं की जन्नत...!!! "